झारखंड में कड़ाके की शीतलहर: क्यों जम रहे हैं लोग, जानें तापमान से लेकर बचाव तक की पूरी जानकारी!
क्या आप इस ठंड से परेशान हैं? क्या सुबह उठते ही आपको खिड़की के बाहर घना कोहरा और हड्डियों को कंपा देने वाली सर्द हवा का सामना करना पड़ रहा है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। पिछले कुछ दिनों से झारखंड का मौसम पूरी तरह से बदल चुका है और शीतलहर ने राज्य के कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। आलम यह है कि दिन में सूरज खिलने के बावजूद, बर्फीली हवाओं के आगे धूप बेअसर साबित हो रही है, और लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। यह केवल एक सामान्य सर्दी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी गंभीर मौसम की स्थिति है जिसने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस कड़ाके की ठंड का सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और किसानों पर पड़ रहा है।
इस विस्तृत लेख में, हम आपको बताएंगे कि आखिर झारखंड में इस कड़ाके की ठंड और तापमान में अचानक आई गिरावट के पीछे की असली वजह क्या है। हम न सिर्फ मौसम विज्ञान के नजरिए से इसका विश्लेषण करेंगे, बल्कि राज्य के प्रमुख जिलों के नवीनतम तापमान, खेती-किसानी पर इसके प्रभाव और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी गहराई से बात करेंगे। आप यह भी जानेंगे कि खुद को और अपने परिवार को इस जानलेवा सर्दी से कैसे सुरक्षित रखें। यह आर्टिकल आपको झारखंड की शीतलहर से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, ताकि आप इस मौसम का सामना पूरी तैयारी के साथ कर सकें।
झारखंड में शीतलहर का प्रकोप: क्यों पड़ रही है इतनी कड़ाके की ठंड?
झारखंड, जिसे अमूमन एक समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय राज्य माना जाता है, वहां इस तरह की तीव्र शीतलहर का पड़ना कई जटिल मौसमी और भौगोलिक कारकों का परिणाम है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में ठंड का यह प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका मुख्य कारण उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही बर्फीली हवाएँ हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और बर्फीली हवाओं का गठजोड़
शीतलहर (Cold Wave) की स्थिति तब बनती है जब किसी क्षेत्र का न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। झारखंड के संदर्भ में, इसके दो प्रमुख कारण हैं:
- उत्तरी बर्फीली हवाओं का सीधा प्रवेश: हिमालय और उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) में भारी बर्फबारी के बाद, वहाँ से आने वाली ठंडी और शुष्क हवाएँ (जिन्हें अक्सर ‘कटार’ हवाएँ कहा जाता है) जब मैदानी इलाकों से होते हुए झारखंड तक पहुँचती हैं, तो यह तापमान को तेजी से गिरा देती हैं। ये हवाएँ उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से निचले दबाव वाले क्षेत्रों की ओर बहती हैं, और इनकी गति व तीव्रता सीधे तौर पर हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी की मात्रा पर निर्भर करती है।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance – WD): पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले तूफ़ानी बादल हैं जो पश्चिम से पूर्व की ओर यात्रा करते हैं और उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करते हैं। जब एक पश्चिमी विक्षोभ आगे निकल जाता है, तो उसके तुरंत बाद उत्तर-पश्चिमी हवाएँ बिना किसी बाधा के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। वर्तमान में, झारखंड में ठंड की तीव्रता बढ़ने का मुख्य कारण यही है कि एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बाद, तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि अब इन हवाओं को रोकने वाला कोई अवरोध नहीं है।

झारखंड की भौगोलिक स्थिति का योगदान
झारखंड की भौगोलिक संरचना भी इस कड़ाके की ठंड को बढ़ावा देती है। राज्य पठारी क्षेत्र पर स्थित है, जिसकी औसत ऊँचाई मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक है।
- वन क्षेत्र और आर्द्रता: राज्य में सघन वन और ऊँचे पठारी क्षेत्र (जैसे रांची और नेतरहाट के आसपास) हैं। नमी और ठंडी हवा का मिश्रण रात के समय तीव्र पाला (Frost) और घना कोहरा (Dense Fog) पैदा करता है।
- तेजी से ऊष्मा का ह्रास: रात के समय, शुष्क हवा और साफ आसमान के कारण पृथ्वी की सतह से ऊष्मा (Heat) का विकिरण तेजी से होता है। इसे ‘रेडिएशन कूलिंग’ कहा जाता है। चूंकि हवा में आर्द्रता कम होती है, इसलिए वह ऊष्मा को रोक नहीं पाती, जिससे न्यूनतम तापमान बहुत नीचे चला जाता है।
- तापमान में दिन-रात का बड़ा अंतर: दिन में सूरज की रोशनी (धूप) से तापमान थोड़ा बढ़ जाता है, लेकिन जैसे ही शाम ढलती है, तापमान तेजी से गिरता है, जिससे ठंड की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। यही कारण है कि ‘धूप खिलने के बाद भी ठंड बरकरार’ रहती है।
राज्य के प्रमुख जिलों में तापमान की स्थिति
शीतलहर ने राज्य के लगभग सभी हिस्सों को प्रभावित किया है, लेकिन कुछ जिले ऐसे हैं जहां स्थिति गंभीर है और तापमान ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
गुमला बना सबसे ठंडा स्थान: 3.5°C का रिकॉर्ड
राज्य में सबसे ज्यादा ठिठुरन गुमला जिले में दर्ज की गई, जहां न्यूनतम तापमान गिरकर मात्र 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गुमला की ऊँचाई और वन क्षेत्र इसे उत्तरी हवाओं के सीधे संपर्क में लाते हैं, जिससे यह इलाका राज्य के सबसे ठंडे स्थानों में से एक बन गया है। इस तापमान ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
रांची, जमशेदपुर और डालटनगंज का हाल
राज्य की राजधानी रांची में भी तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच मंडरा रहा है, जो सामान्य से काफी नीचे है। शहरी इलाकों में भी लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखाई दे रहे हैं, और शाम होते ही बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) और डालटनगंज (पलामू) जैसे अन्य प्रमुख शहरों में भी तापमान तेजी से गिरा है। पलामू प्रमंडल, जो उत्तर-पश्चिमी हवाओं के प्रवेश द्वार पर स्थित है, वह भी इस ठंड से बुरी तरह प्रभावित है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में तापमान में मामूली (1 से 2 डिग्री) बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन सर्दी से लोगों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञ 10 दिसंबर के बाद तापमान में फिर से गिरावट आने की आशंका जता रहे हैं, जिससे यह शीतलहर का दौर और भी लंबा खिंच सकता है।
| जिले का नाम | न्यूनतम तापमान (लगभग) | सामान्य न्यूनतम तापमान (दिसंबर) | वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी |
| गुमला | 3.5°C | 9°C – 10°C | सबसे ठंडा जिला; रिकॉर्ड गिरावट। |
| रांची | 5.5°C | 11°C – 12°C | राजधानी क्षेत्र; तीव्र ठंड का अहसास। |
| जमशेदपुर | 7.0°C | 13°C – 14°C | औद्योगिक शहर; शाम और सुबह कड़ाके की ठंड। |
| डालटनगंज (पलामू) | 6.0°C | 10°C – 11°C | उत्तरी हवाओं से सीधा प्रभावित क्षेत्र। |
| हजारीबाग | 4.5°C | 10°C – 11°C | पठारी क्षेत्र; पाला (Frost) पड़ने की संभावना। |
(Data Visualization: Comparison Table) यह तालिका वर्तमान मौसम के एक विशिष्ट दौर पर आधारित अनुमानित डेटा प्रस्तुत करती है, जो बताती है कि सामान्य की तुलना में तापमान कितना नीचे चला गया है।
जनजीवन पर ठंड का व्यापक असर
इस अभूतपूर्व शीतलहर का सीधा और व्यापक असर झारखंड के आम जनजीवन पर पड़ा है। यातायात से लेकर दैनिक मजदूरी तक, हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
स्वास्थ्य जोखिम और बचाव के उपाय
ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकारी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, निमोनिया और हाइपोथर्मिया (Hypothermia) के मामले बढ़ गए हैं।
- हाइपोथर्मिया: शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक गिर जाना, जो खासकर बेघर लोगों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
- निमोनिया और श्वसन संबंधी रोग: ठंडी और शुष्क हवाएँ श्वसन प्रणाली को प्रभावित करती हैं, जिससे बच्चों और अस्थमा के मरीजों में निमोनिया और ब्रोंकाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
- हृदय रोग: ठंड के कारण रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ जाता है। यह हृदय रोगियों के लिए अत्यधिक खतरनाक हो सकता है।
बचाव के लिए: लोगों को सलाह दी जाती है कि वे गर्म कपड़े (Thermal wear) पहनें, खासकर कान और सिर को ढक कर रखें। गर्म तरल पदार्थ (चाय, सूप) का सेवन करें और जहाँ तक संभव हो सुबह और देर शाम घर से बाहर निकलने से बचें।
यातायात और परिवहन में बाधाएँ
घने कोहरे ने सड़क, रेल और हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है।
- सड़क यातायात: नेशनल और स्टेट हाईवे पर विजिबिलिटी (दृश्यता) बहुत कम हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई अंतर-राज्यीय बसें घंटों देरी से चल रही हैं।
- रेल परिचालन: कोहरे के कारण ट्रेनों की गति धीमी कर दी गई है, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटे पीछे चल रही हैं।
- स्कूल और शैक्षणिक संस्थान: कई जिलों में प्रशासन ने ठंड को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया है या उन्हें बंद करने का आदेश दिया है, ताकि बच्चों को सुबह की कड़ाके की ठंड से बचाया जा सके।
खेती और पशुपालन पर शीतलहर का प्रभाव
झारखंड की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर करती है। अचानक और तीव्र ठंड का सबसे बड़ा शिकार किसान ही बनते हैं।
किसानों के लिए विशेष सलाह
कड़ाके की ठंड, पाला (Frost), और अत्यधिक कम तापमान रबी की फसलों (जैसे आलू, टमाटर, सरसों) को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। पाला पड़ने से पौधे के अंदर की कोशिकाएँ जम जाती हैं और फसल नष्ट हो जाती है।
- सिंचाई की रणनीति: किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पाला पड़ने की आशंका होने पर शाम के समय अपनी फसलों में हल्की सिंचाई करें। सिंचाई से मिट्टी का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है और नमी पाले के सीधे असर को कम करती है।
- धुएं का प्रयोग: रात के समय खेतों के किनारों पर कूड़े या कृषि अपशिष्ट को जलाकर धुआँ करने से खेत के ऊपर एक हल्की परत बन जाती है, जो ऊष्मा को बाहर निकलने से रोकती है और फसलों को पाले से बचाती है।
- पशुपालन: पशुओं को भी ठंड से बचाना महत्वपूर्ण है। उन्हें रात में खुले में न रखें, पशुशाला को जूट या पुआल से ढक दें, और उनके भोजन में ऊर्जा देने वाले तत्वों (जैसे गुड़ या तेल) को शामिल करें।
सरकार और प्रशासन की तैयारी: अलाव और रैन बसेरे
शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए, झारखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाई है।
आपातकालीन सहायता और हेल्पलाइन नंबर
नगर निगमों और स्थानीय निकायों को सार्वजनिक स्थानों पर अलाव (Bonfires) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। चौक-चौराहों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों के बाहर लकड़ी की व्यवस्था की गई है ताकि गरीब और बेघर लोगों को कुछ राहत मिल सके।
- रैन बसेरों का विस्तार: प्रशासन ने अस्थायी रैन बसेरों (Night Shelters) की संख्या बढ़ाई है, और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति रात को खुले आसमान के नीचे न सोए। इन रैन बसेरों में कंबल और गर्म पानी की व्यवस्था भी की जा रही है।
- कंबल वितरण: कई स्वयंसेवी संगठनों और सरकारी एजेंसियों द्वारा जरूरतमंदों के बीच कंबल और गर्म कपड़े वितरित किए जा रहे हैं।
- मीडिया के माध्यम से जागरूकता: स्वास्थ्य विभाग लगातार मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ठंड से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक कर रहा है।
ऐतिहासिक तुलना: क्या यह झारखंड की सबसे सर्द रात है?
झारखंड में अक्सर दिसंबर और जनवरी के महीनों में शीतलहर का अनुभव होता है, लेकिन वर्तमान ठंड की तीव्रता असाधारण है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच पहले भी दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए, 2018-19 और 2012-13 की सर्दियों में भी कई बार तापमान 5 डिग्री से नीचे गया था।
हालांकि, इस बार की शीतलहर की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत जल्दी हुई है और दिन में धूप निकलने के बावजूद ठंड का असर बना हुआ है। यानी, दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और आर्कटिक क्षेत्रों में मौसमी बदलावों के कारण भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में ठंड की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर झारखंड जैसे राज्यों पर भी पड़ रहा है। वर्तमान स्थिति भले ही रिकॉर्ड-तोड़ न हो, लेकिन लगातार बनी रहने वाली यह कड़ाके की ठंड निश्चित रूप से पिछले कुछ वर्षों की सबसे गंभीर शीतकालीन परिस्थितियों में से एक है।
Conclusion
झारखंड में चल रही यह तीव्र शीतलहर केवल मौसम की एक घटना नहीं है, बल्कि यह राज्य के जनजीवन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है। गुमला में दर्ज किए गए 3.5°C के रिकॉर्ड से लेकर रांची तक हर जगह लोग कंपकंपा रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पैदा हुई यह ठंड, दिन में धूप खिलने के बावजूद बरकरार है, यह दर्शाती है कि यह एक लंबी और मुश्किल लड़ाई है। हमने इस लेख में समझा कि इस ठंड के पीछे के वैज्ञानिक कारण क्या हैं, इसका स्वास्थ्य और कृषि पर क्या असर पड़ रहा है, और प्रशासन इससे निपटने के लिए क्या प्रयास कर रहा है।
यह समय है कि हम सभी मिलकर इस मौसम का सामना करें। व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों को अपनाना, जरूरतमंदों की मदद करना और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना ही इस कड़ाके की ठंड से बचाव का एकमात्र रास्ता है।
कॉल टू एक्शन (CTA): अपने आप को और दूसरों को सुरक्षित रखें! इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें ताकि वे भी झारखंड की शीतलहर से बचने के लिए आवश्यक कदम उठा सकें। यदि आप किसी बेघर व्यक्ति को देखते हैं, तो कृपया स्थानीय रैन बसेरा हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या उन्हें कंबल प्रदान करें।
People Also Ask (FAQs)
1. शीतलहर (Cold Wave) की आधिकारिक परिभाषा क्या है और झारखंड में इसे कब घोषित किया जाता है?
शीतलहर की घोषणा तब की जाती है जब किसी क्षेत्र का न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मैदानी इलाकों में शीतलहर की स्थिति तब मानी जाती है जब न्यूनतम तापमान 10°C या उससे कम हो, और सामान्य न्यूनतम तापमान से 4.5°C से 6.4°C तक की गिरावट दर्ज की जाए। झारखंड में, जहां कई जिलों का तापमान पहले ही 3.5°C से 7°C के बीच है, और यह सामान्य से 5 डिग्री से अधिक कम है, ऐसे में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। यह घोषणा प्रशासन को आपातकालीन बचाव उपाय शुरू करने की अनुमति देती है।
2. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) किस प्रकार झारखंड में ठंड को बढ़ाता है?
पश्चिमी विक्षोभ सीधे तौर पर ठंडी हवाएँ नहीं लाता, बल्कि यह ठंडी हवाओं के मार्ग को साफ करता है। पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी और वर्षा का कारण बनता है। जब यह विक्षोभ पूर्व की ओर बढ़ जाता है, तो उसके पीछे-पीछे उच्च दबाव वाला एक ठंडा क्षेत्र बनता है। यह उच्च दबाव वाला क्षेत्र उत्तर-पश्चिम दिशा से ध्रुवीय (Polar) हवाओं को बिना किसी बाधा के पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अंततः झारखंड तक धकेलता है। इन बर्फीली हवाओं के कारण ही तापमान में तीव्र और अचानक गिरावट आती है, जिससे झारखंड में ठंड बढ़ जाती है।
3. ठंड के मौसम में हाइपोथर्मिया से बचाव के लिए झारखंड के निवासियों को क्या करना चाहिए?
हाइपोथर्मिया एक जानलेवा स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान 35°C (95°F) से नीचे चला जाता है। झारखंड के निवासियों, खासकर बुजुर्गों और बच्चों को इससे बचने के लिए बहुस्तरीय कपड़े (Layering) पहनने चाहिए—जैसे पहले थर्मल वियर, फिर ऊनी वस्त्र और अंत में हवा-रोधी जैकेट। सिर, कान और हाथ-पैरों को गर्म रखना आवश्यक है क्योंकि शरीर की अधिकांश गर्मी इन्हीं अंगों से निकलती है। शराब और कैफीन के अत्यधिक सेवन से बचें, क्योंकि वे शरीर को गर्म होने का झूठा एहसास देते हैं। नियमित रूप से गर्म और पौष्टिक भोजन का सेवन करें।
4. शीतलहर के दौरान किसानों को आलू और टमाटर जैसी फसलों को पाले से बचाने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए?
पाला (Frost) फसलों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आलू, टमाटर, मटर, और सरसों जैसी रबी की फसलों को बचाने के लिए किसान रात के समय हल्की सिंचाई कर सकते हैं। पानी की नमी रात में मिट्टी से ऊष्मा को धीरे-धीरे निकलने देती है, जिससे तापमान शून्य से नीचे नहीं गिर पाता। इसके अलावा, रात के अंतिम पहर (देर रात 2 बजे से सुबह 5 बजे) में खेत के चारों ओर घास या फसलों के डंठल को जलाकर हल्का धुआँ करना चाहिए। यह धुआँ खेत के ऊपर एक पतली “सुरक्षात्मक परत” बनाता है, जो पाले के सीधे संपर्क को रोकता है और ठंड के प्रभाव को कम करता है।
5. झारखंड के किस जिले में औसतन सबसे कम तापमान दर्ज किया जाता है और इसके पीछे क्या भौगोलिक कारण है?
ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड में औसतन सबसे कम तापमान अक्सर गुमला और नेतरहाट (जो लातेहार जिले में है, लेकिन पास ही है) जैसे पठारी क्षेत्रों में दर्ज किया जाता है। इसका मुख्य भौगोलिक कारण उनकी ऊँचाई (Altitude) है। ये क्षेत्र रांची के पठार के पश्चिमी भाग में स्थित हैं और समुद्र तल से काफी ऊपर हैं। ऊँचाई अधिक होने के कारण ये उत्तरी-पश्चिमी ठंडी हवाओं के सीधे मार्ग पर पड़ते हैं। इसके अलावा, इन क्षेत्रों में सघन वनस्पति और कम शहरीकरण होने के कारण रात के समय ‘विकिरण शीतलन’ (Radiation Cooling) तेजी से होता है, जिससे न्यूनतम तापमान बहुत तेजी से गिरता है और ठंड कड़ाके की हो जाती है।
(MCQ Quiz)
1. झारखंड में वर्तमान शीतलहर का मुख्य कारण किस दिशा से आने वाली बर्फीली हवाएँ हैं?
A. दक्षिण-पूर्व
B. उत्तर-पश्चिम
C. उत्तर-पूर्व
D. दक्षिण-पश्चिम
Correct Answer: B
2. वर्तमान शीतलहर के दौरान झारखंड के किस जिले ने सबसे कम (3.5°C) न्यूनतम तापमान दर्ज किया है?
A. रांची
B. जमशेदपुर
C. डालटनगंज
D. गुमला
Correct Answer: D
3. फसलों को पाले (Frost) से बचाने के लिए किसानों को कौन सा उपाय अपनाना चाहिए?
A. दिन में गहरी जुताई करना
B. रात में खेतों में हल्की सिंचाई करना
C. फसलों को प्लास्टिक की चादर से ढकना
D. अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरक डालना
Correct Answer: B
4. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की उत्पत्ति मुख्य रूप से किस क्षेत्र से होती है?
A. बंगाल की खाड़ी
B. अरब सागर
C. भूमध्यसागरीय क्षेत्र
D. प्रशांत महासागर
Correct Answer: C
5. कड़ाके की ठंड में शरीर के तापमान के खतरनाक स्तर (35°C से नीचे) तक गिर जाने की स्थिति को क्या कहते हैं?
A. हीट स्ट्रोक
B. हाइपोग्लाइसीमिया
C. हाइपोथर्मिया
D. शीत दंश (Frostbite)
Correct Answer: C






