बंगाल की खाड़ी में बढ़ी हलचल: IMD का अलर्ट, दक्षिण और मध्य भारत में भारी बारिश व भीषण शीतलहर का बड़ा अपडेट
भारत का मौसम एक बार फिर तेजी से करवट ले चुका है। बंगाल की खाड़ी में बन रही नई मौसमी प्रणाली के कारण दक्षिण भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक मौसम की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, खाड़ी में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से तमिलनाडु, केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, मध्य भारत के कई हिस्सों में इस समय भीषण शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे मौसम और ठंडा होता जा रहा है। उत्तर भारत की बात करें तो दिल्ली में तापमान में मामूली राहत जरूर मिली है, लेकिन स्काईमेट वेदर के मुताबिक अभी ठंड की वापसी जल्दी संभव नहीं है। पूर्वी भारत में तापमान सामान्य से ऊपर है, लेकिन आने वाले दिनों में यहां भी बदलाव होने की संभावना जताई गई है।
बंगाल की खाड़ी में मौसमी हलचल बढ़ी
बंगाल की खाड़ी में पिछले कुछ दिनों से लगातार मौसम प्रणाली में बदलाव देखा जा रहा है। वर्तमान स्थिति में तमिलनाडु के समीप समुद्री क्षेत्र में एक मजबूत साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रणाली आगे चलकर डिप डिप्रेशन का रूप ले सकती है, जिससे दक्षिण भारत में वर्षा का दौर तेज हो जाएगा।
इस प्रणाली के प्रभाव से निम्नलिखित राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है:
- तमिलनाडु
- केरल
- माहे
- तटीय आंध्र प्रदेश
- यनम
- रायलसीमा
IMD ने 19 से 25 नवंबर के बीच इन राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की चेतावनी जारी की है।

दक्षिण भारत में बारिश का बड़ा अलर्ट
उत्तर-पूर्वी मानसून इस वर्ष सामान्य से कमजोर रहा है। हालांकि, मौसम विभाग की मानें तो नवंबर के अंतिम हफ्ते में बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बन रहे डिप डिप्रेशन की वजह से अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु, केरल और माहे में लगातार बारिश का दौर जारी रह सकता है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। IMD के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठ रही नमी तटीय हिस्सों में भीषण वर्षा का कारण बन सकती है।
मध्य और पश्चिम भारत में भीषण शीतलहर
पांच राज्यों में ठंड का असर सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गया है। मध्य प्रदेश, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पूर्वी राजस्थान में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। IMD ने 20 नवंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण शीतलहर की चेतावनी दी है। राजस्थान के सीकर में न्यूनतम तापमान 5.5°C दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे कम दर्ज तापमान है।
शीतलहर प्रभावित राज्य:
| राज्य | न्यूनतम तापमान | स्थिति |
|---|---|---|
| मध्य प्रदेश | 6°C–8°C | भीषण शीतलहर |
| राजस्थान (सीकर) | 5.5°C | सबसे कम तापमान |
| गुजरात | 8°C–10°C | शीतलहर |
| महाराष्ट्र (मध्य) | 9°C–12°C | शीतलहर |
| तेलंगाना | 10°C–13°C | शीतलहर |
दिल्ली में ठंड की रफ्तार हुई धीमी
दिल्ली में पिछले चार दिनों से न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे बना हुआ है। 17 नवंबर को राजधानी में न्यूनतम तापमान 8.7°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 3.6°C कम है। स्काईमेट वेदर के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बनी मौसम प्रणाली के कारण दिल्ली के तापमान में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट नहीं होगी। महीने के अंत तक दिल्लीवासियों को हल्की राहत मिलने की संभावना है।
पूर्वी भारत में मौसम का मिजाज
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूर्वी भारत के कई राज्यों में फिलहाल ठंड का असर कम है। यहां तापमान सामान्य से 2–3°C अधिक बना हुआ है। न्यूनतम तापमान 18–20°C तक दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने अंदेशा जताया है कि बंगाल की खाड़ी की प्रणाली सक्रिय होने के बाद यहां भी तापमान में मामूली गिरावट देखी जा सकती है।
अगले 7 दिनों का मौसम पूर्वानुमान (तालिका)
| तारीख | क्षेत्र | मौसम स्थिति | संभावना |
|---|---|---|---|
| 19–20 नवंबर | तमिलनाडु | भारी बारिश | 85% |
| 21–24 नवंबर | केरल, माहे | बहुत भारी बारिश | 90% |
| 20–22 नवंबर | मध्य प्रदेश | भीषण शीतलहर | 80% |
| 19–25 नवंबर | आंध्र प्रदेश, यनम | भारी बारिश | 75% |
| अगले 3 दिन | बिहार, यूपी पूर्व | तापमान में मामूली वृद्धि | 60% |
निष्कर्ष
भारत में इस समय मौसम दो अलग-अलग रूप दिखा रहा है। एक ओर दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है, वहीं मध्य और पश्चिम भारत भीषण शीतलहर की चपेट में हैं। दिल्ली में फिलहाल ठंड की रफ्तार थमी है लेकिन आगे चलकर तापमान में फिर बदलाव संभव है। पूर्वी भारत में तापमान सामान्य से अधिक है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बन रही प्रणाली इसे भी प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर आने वाले कुछ दिन मौसम में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
MCQ क्विज (उत्तर सहित)
1. बंगाल की खाड़ी में किस वजह से मौसम में बदलाव आया है?
A. पश्चिमी विक्षोभ
B. साइक्लोनिक सर्कुलेशन
C. तटीय हवाएं
D. हिमपात
उत्तर: B
2. सीकर (राजस्थान) में न्यूनतम तापमान कितना दर्ज हुआ?
A. 8°C
B. 10°C
C. 5.5°C
D. 12°C
उत्तर: C
3. दिल्ली का न्यूनतम तापमान 17 नवंबर को कितना था?
A. 12°C
B. 15°C
C. 9.5°C
D. 8.7°C
उत्तर: D
4. उत्तर-पूर्वी मानसून का सबसे अधिक प्रभाव किन राज्यों पर होता है?
A. पंजाब और हरियाणा
B. गुजरात और महाराष्ट्र
C. तमिलनाडु और केरल
D. दिल्ली और राजस्थान
उत्तर: C
5. पूर्वी भारत में तापमान औसत से कितना ऊपर बना हुआ है?
A. 1°C
B. 2–3°C
C. 4–5°C
D. 6°C
उत्तर: B
FAQs
1. बंगाल की खाड़ी में बन रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव किन राज्यों पर पड़ेगा?
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन दक्षिण भारत के मौसम को काफी प्रभावित करता है। यह प्रणाली जब मजबूत होती है, तो तमिलनाडु, केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भारी से बहुत भारी बारिश ला सकती है। इसके साथ ही आर्द्रता बढ़ने से उत्तरी और पूर्वी भारत के तापमान में भी अप्रत्यक्ष बदलाव देखने को मिलता है।
2. शीतलहर किन परिस्थितियों में घोषित की जाती है?
जब किसी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान सामान्य से 6°C से अधिक कम हो जाए या 10°C से नीचे गिर जाए, तो वहां शीतलहर घोषित की जाती है। यदि तापमान इससे भी अधिक गिर जाए तो भीषण शीतलहर की स्थिति बनती है। इस वर्ष मध्य भारत में तापमान तेजी से गिरने के कारण कई इलाकों में इसी तरह की चेतावनी जारी की गई है।
3. दिल्ली में ठंड क्यों कम हुई है?
दिल्ली में इस समय ठंड की रफ्तार इसलिए कम हुई है क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बनी प्रणाली से नमी उत्तर भारत की तरफ पहुंच रही है, जिससे तापमान में तेजी से गिरावट रुक गई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ दिनों तक दिल्ली में इसी तरह हल्की राहत बनी रहेगी।
4. पूर्वी भारत में तापमान सामान्य से अधिक क्यों है?
पूर्वी भारत में हवाओं की दिशा के कारण तापमान सामान्य से 2–3°C ऊपर बना हुआ है। बंगाल की खाड़ी की नमी अभी पूर्वी राज्यों तक मजबूत रूप से नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले हफ्ते यहां मौसम में बदलाव संभव है।
5. भारी बारिश के दौरान किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?
भारी बारिश के दौरान बिजली के खंभों, पेड़ों और पानी भरे इलाकों से दूर रहना चाहिए। समुद्री इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जाती है। साथ ही घरों में पानी जमा होने पर तुरंत निकासी की व्यवस्था करें। मौसम विभाग के अलर्ट को नियमित रूप से फॉलो करना आवश्यक होता है।






